एक अनार और सौ बीमार: संगठन चुनाव से बढ़ी सरगर्मी, कांग्रेस में अध्यक्ष पद पर मचा घमासान, कुर्सी पर सस्पेंस गहराया
पॉलिटिकल रिपोर्टर|बलौदा बाजार
कांग्रेस के संगठन चुनाव ने बलौदा बाजार जिले की राजनीति में ऐसा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है कि हर गली-मोहल्ले में अब सिर्फ एक ही चर्चा है – कांग्रेस जिला अध्यक्ष की कुर्सी आखिर किसे मिलेगी? यह वही कुर्सी है जिस पर बैठने के लिए नेताओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। हालात “एक अनार और सौ बीमार” जैसे हो गए हैं। कोई अपने सामाजिक समीकरणों का सहारा ले रहा है तो कोई कार्यकर्ताओं की निष्ठा और संघर्ष को अपनी ताकत बताकर हाईकमान तक अपनी दावेदारी पहुंचाने में जुटा है।
कौन होगा कांग्रेस जिला अध्यक्ष।
दावेदारों की लंबी फेहरिस्त, जिले में राजनीतिक भूचाल
जिला अध्यक्ष की एक कुर्सी पर कई दावेदारों की निगाहें हैं। हर दावेदार अपनी-अपनी ताकत और नेटवर्क के बूते संगठन को प्रभावित करने का दावा कर रहा है। इधर जिले में सात दिनों तक पर्यवेक्षक दल डेरा डालने वाले है उनकी कड़ी परख नेताओं की धड़कनें तेज कर दी हैं। कहा जा रहा है कि दल दिवाली से पहले ही अपनी रिपोर्ट दिल्ली हाईकमान तक पहुंचा देगा। इसके बाद हाईकमान तय करेगा कि बलौदा बाजार जिले की कमान किसे सौंपी जाए।फिलहाल हर दावेदार अपनी पूरी ताकत झोंक चुका है। छोटे-छोटे कार्यक्रम, कार्यकर्ताओं की बैठकें और स्थानीय स्तर पर सक्रियता अचानक बढ़ गई है।
बलौदा बाजार का जिला अध्यक्ष बनना सिर्फ राजनीतिक महत्व का सवाल नहीं है, बल्कि दावेदारों की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से भी गहराई से जुड़ा है। संगठनात्मक दृष्टि से यह पद बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की रणनीति तय करने में जिला अध्यक्ष की भूमिका अहम होगी। दूसरी ओर, महत्वाकांक्षा का पहलू यह है कि कांग्रेस में अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है, जबकि अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। ऐसे में जिला अध्यक्ष बनने वाला नेता कार्यकाल चुनावी टिकट के लिए अपनी दावेदारी ठोक सकता है। पहले भी कई नेताओं ने ऐसा किया है। यही कारण है कि यह पद कार्यकर्ताओं के बीच ही नहीं, बल्कि संभावित टिकट चाहने वालों के बीच भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
दिल्ली हाईकमान ने इस बार साफ कर दिया है कि जिला अध्यक्ष का चयन जमीनी पकड़ और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव के आधार पर ही होगा। इसके लिए महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और पांच बार के विधायक नितिन रावत को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। उनके साथ पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर, पूर्व विधायक गुरमुख सिंह होरा और राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के महामंत्री पूर्णचंद कोको पाढ़ी को भी जिम्मेदारी दी गई है। यह पूरी टीम सात दिन तक जिले में रहकर न केवल दावेदारों से मुलाकात करेगी, बल्कि वरिष्ठ नेताओं, सक्रिय कार्यकर्ताओं, मीडिया प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से भी राय लेगी। सबसे खास बात यह है कि इस बार किसी बड़े नेता की सिफारिश काम नहीं आएगी।
तीन बड़े नाम सबसे आगे
दावेदारों की भीड़ में फिलहाल तीन नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में हैं –
सुनील माहेश्वरी – संगठनात्मक सक्रियता और बेबाक छवि के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर तक पुरस्कार हासिल किए हैं। वे हमेशा दूसरे और तीसरे पंक्ति के कार्यकर्ताओं की लड़ाई लड़ते हैं, लेकिन वरिष्ठ नेताओं का समर्थन जुटाना उनके लिए चुनौती है। उन्होंने दूरभाष पर कहा – “दावेदारी जैसी कोई बात नहीं है। अगर अवसर मिला तो जमीनी कार्यकर्ताओं के सम्मान की रक्षा करते हुए संगठन को मजबूत करने का काम करूंगा।”
हितेंद्र ठाकुर – हाल ही में अपना कार्यकाल पूरा कर चुके पूर्व जिला अध्यक्ष हितेंद्र ठाकुर का कार्यकाल लगभग निर्विवाद रहा। वरिष्ठ नेताओं से अच्छे संबंध होने की वजह से उन्हें मजबूत समर्थन मिलने की संभावना है। हालांकि वे इस बार दावेदारी करेंगे या नहीं, यह अभी सस्पेंस बना हुआ है।
सुमित्रा धृतलहरे – मौजूदा जिला अध्यक्ष सुमित्रा धृतलहरे महिला और अनुसूचित जाति वर्ग से होने के कारण सामाजिक समीकरणों का लाभ उठा सकती हैं। अनुसूचित जाति समुदाय कांग्रेस का सबसे बड़ा वोट बैंक है, जो उनकी दावेदारी को और मजबूती देता है।
मैदान में और भी कई दावेदार
हालांकि यह मुकाबला सिर्फ इन्हीं तीन तक सीमित नहीं है। दबे स्वर में पूर्व मंडी अध्यक्ष सुशील शर्मा, परमेश्वर यदु, रमेश धृतलहरे, शैलेन्द्र बंजारे, बसंत आडील, पूर्व विधायक शकुंतला साहू, जनपद सदस्य आर्यन शुक्ला, संदीप पांडेय समेत कसडोल और पलारी क्षेत्र से भी कई नाम चर्चा में हैं। ये सभी नेता अपने समर्थकों के साथ सक्रिय हो चुके हैं और पर्यवेक्षक दल के सामने अपना बायोडाटा प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं।
संगठन सृजन का बड़ा अभियान
कांग्रेस पहली बार “संगठन सृजन” के तहत जिले-दर-जिले संगठन को नए सिरे से खड़ा कर रही है। छह माह पहले ही छत्तीसगढ़ के 11 जिलों – बलौदा बाजार, बेमेतरा, बालोद, सारंगढ़-बिलाईगढ़, दुर्ग ग्रामीण, नारायणपुर, कोंडागांव, कोरबा (शहर और ग्रामीण), सरगुजा और बलरामपुर – में नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे। अब बलौदा बाजार की बारी है। पार्टी पहले ही बूथ और मंडल स्तर के अध्यक्ष नियुक्त कर चुकी है। ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति जिला अध्यक्ष तय होने के बाद की जाएगी। ऐसे में यह चुनाव संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह से नई दिशा देगा।
कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार
बलौदा बाजार में कांग्रेस जिला अध्यक्ष की कुर्सी किसके पास जाएगी, यह फिलहाल सबसे बड़ा सवाल है। पर्यवेक्षक दल की रिपोर्ट और हाईकमान की मुहर ही इस सस्पेंस को खत्म करेगी। लेकिन इतना तय है कि जिस नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, वही आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की रणनीति का केंद्र होगा और जिले की राजनीति का सबसे अहम चेहरा बनकर उभरेगा।
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